Monday, April 8, 2013

IPL आ गया ।


IPL आ गया ।
अब तो ...
देशवासियों के समय का उद्धार होगा ही ।

सट्टे लगेंगे ही ।
गुजराती कमाएंगे ही ।
दारू चलेगी ही ।
छात्र पियेंगे ही ।
बाप की कमाई सट्टे में डूबायेंगे ही । 
IIT इम्तिहान डूबोयेंगे  ही ।

माल्या दारू पीते दिखेगा ही ।
देशवासी माल्या की तरह जीने को ललचायेंगे ही ।

रूस की अर्ध नग्न चीयर लीडर्स अपने मादक झटके दिखाएंगी ही ।
फॅमिली वाले चार या छे पड़ने पे शर्माएगी ही ।
चीयर लीडर्स को चुपचाप देख के अनदेखा करने की कोशिश करेंगे ही।

फिल्म सितारे मैच देखते हुए दिखेंगे ही ।
उनको पेमेंट मिलेगा ही ।

खिलाडी ज्यादा पैसे में बिकने के लिए जी जान लगायेंगे ही ।
क्रिकेट ताक़ पे रखा जायेगा ही ।
मैच के बाद रेव पार्टी में जायेंगे ही ।

विज्ञापन जोर आजमाएंगे ही ।
हर दो मिनट में बोर करने आएंगे ही ।
पेप्सी कोला कितना ज़रूरी है यह तो बताएँगे ही  |

शिल्प जीरो फिगर दिखाएगी ही ।
नीता उछलेगी  ही । हरभजन को गले लगाएगी ही ।
सिद्धू पकायेगा ही  |

कारपोरेट का काला धन सफ़ेद होगा ही ।
अर्थ व्ययस्था का कद्दू कटेगा ही ।
उप्पर वालों को परसाद बटेगा ही ।
और शरद पवार को कट तो मिलेगा ही ।

पार्टियाँ चलेंगी ही ।
खिलाडी, नेता, और कारपोरेट लीडर्स,  मॉडल्स के साथ दारू पी के नाचेंगे ही ।
फिर होटल के कमरे में पकडे जायेंगे ही ।
अपनी बीबी से मार खायेंगे ही ।

सचिन का जयकारा लगेगा ही ।
वो दौड़ने की कोशिश करेगा ही ।
एक और बंगले का पैसा जमा करेगा ही ।

मीडिया में आईपीएल छाया रहेगा ही ।
दो महीने तक ज़रूरी मुद्दों की उपेक्षा होगी ही ।
जनता खिलाडियों के शौर्य, और न्रित्यांग्नाओं के सर्वागींण दर्शन से भ्रमित होगी ही ।

आईपीएल का मेला हिट होगा ही ।

देश भाड़ में जायेगा ही ।

Thursday, July 26, 2012

निर्दोषों का देश हमारा

इस देश में निर्दोषों की कमी नहीं है, एक ढूंढो हज़ार मिलते हैं । कमी है तो सिर्फ दोषियों की! एक  ढूंढो तो ससुरा आधा भी नहीं मिलता । चौथाई तक मिलकर नहीं देता। जो देखो वाही निर्दोष है। जिसके कपडे जितने सफ़ेद हैं,  उजले हैं, भगवा हैं। वह उतना ही ज्यादा निर्दोष है । नरसंहार  किया है ? कोई बात नहीं साहब आपने तो यह काम हिन्दू हित में किया है, आप तो शर्तिया निर्दोष हैं। आप बलात्कारी हैं? अरे, गारेंटी है की आप निर्दोष हैं । यह तो सामान्य बात है। रिश्वतखोरी करना तो खैर, वैसे भी कोई अपराध नहीं है। वह तो दस्तूर है, चलन है, सामाजिक व्यवहार है। अख़बार जिनका घोटाला लिखते हैं, वह भी दरअसल घोटाला  नहीं होता। उसे अंजाम देने वाले पहले भी निर्दोष थे, आज भी निर्दोष हैं, और भविष्य में भी निर्दोष रहेंगे । आप ने कमीशन खाया है तो आज की डेट मैं मंदिरों की कमी नहीं है, थोडा चढ़ावा एक मंगल का व्रत, पचाने की चूर्ण की तरह  काम करता है, पेट और चरित्र दोनों साफ़ हो जाते हैं । वैसे आप की जेब में पैसा है, आप लखपति या करोड़ पति या अरब पति हैं, तो दुनिया की कोई ताकत आपको दोषी नहीं साबित कर सकती । अदालत क्या होती है, पुलिस है जहाँ, अदालत भी क्या करे वहां। जेसिका लाल का ही मामला देखें, वो मर गयी और सब निर्दोष साबित हो गए। जेसिका लाल भद्र लोक की सदस्या थी, इसलिए थोडा हल्ला मचा, वारना हत्या हो और आप की जेब में माल हो तो कानून क्या कानून का बाप भी आप को दोषी नहीं साबित कर पायेगा।
दरअसल, हमारी इस पवित्र मातृभूमि पर दोषी सिद्ध होने के लिए इंसान को गरीब, बेरोजगार, भुकमरा होना पड़ता है । जब वो बहुतेरे हैं तो दूसरों को दोषी सिद्ध होने की क्या ज़रुरत है? बाकि तो बेचारे इतने ज्यादा निर्दोष होते हैं की जानते ही नहीं दोष क्या होता है । इस अज्ञान के कारन बेचारों से कुछ हो जाता है, तो बात अलग है। यह सही है की अज्ञान स्वयम मैं एक दोष है, वेड पुराण एइसा ही कहते हैं, मगर इतना भी बड़ा दोष नहीं है की उसकी सजा देने के लिए किसी भले आदमी को जेल में ठूस दिया जाये। यह तो सरासर अन्याय है, मानवाधिकार का हनन है! दरअसल, जिसे दोषी बताया जाता है जिस पे ऊँगली उठायी जाती है, वास्तव में उन्हें उनके विरोधी फ़साना चाहते हैं, उनका चरित्र हनन करना चाहते, ताकि वोह आगे न बढ़ सकें। वोह लाखों में खेल रहे हों तो करोड़ों में न खेल सकें, करोड़ों में खेल रहे हों तो अरबों में न खेल सकें, वो एम् एल ए हो तो मंत्री न बन सके, मंत्री हो मुख्य मंत्री न बन सके! वो अफसर हो तो कमाई को पोस्टिंग न हासिल कर सके, और कमाई की पोस्टिंग हो तो हटा दिया जाये ।
इस देश में इतने निर्दोष हैं की कभी कभी पूछने का मन करता है की, क्या वो अपनी ही हत्या के दोषी थे, जिन्हें मार दिया गया, क्या वे बचियाँ युवितयाँ औरतें ही दोषी थी, जिनके साथ बलात्कार हुआ? क्या वो ही लुटेरे थे जो लूट लिए गए, अगर उन्हें मारने वाले सभी निर्दोष हैं तो वोह मरे कैसे? दिल्ली में सिखों और गुजरात में मुसलमानों के नरसंहार का दोषी जब कोई है नहीं है, तो दोषी चले कहाँ गए? या लोग मरे ही नहीं थे ? वैसे आच्छा हुआ की महात्मा गाँधी की हत्या भी आज़ादी मिलने के कुछ दिनों बाद ही हो गयी थी अगर आज होती तो गांधीजी भी अपनी हत्या के लिए दोषी ठहराए जाते क्योंकि उन्हों ने नाथूराम गोडसे को हत्या करने के लिए उत्तेजित किया था और गोडसे निर्दोष करार दिया जाता ।

                           

Friday, September 9, 2011

भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार किसी के पकड़ में नहीं आयेगा, क्यूंकि वह स्थूल नहीं , सूक्षम है अगोचर है | पर उसके बाद भी सर्वत्र व्याप्त है | उसे देखा नहीं जा सकता सिर्फ अनुभव किया जा सकता है |

--- उपरोक्त व्याख्यान ईशवर के हैं, वो भी सूक्षम है अगोचर है, सर्वत्र व्याप्त उसे देखा नहीं जा सकता सिर्फ अनुभव किया जा सकता है. तो क्या भ्रष्टाचार ईशवर हो गया है ?

Monday, August 29, 2011

Much Ado on Anna vs Gandhi


गाँधी जी ने भारत के ९०% अनपढ़ गरीब किसानो का नेतृत्व किया था |

अन्ना ने दिखा दिया की भारत का एक समृद्ध युवा वर्ग जो आज पढ़ा लिखा है (टीवी देख के अनशन करने पहुच जाता है तो मानता हूँ पढ़ा लिखा ही होगा, और मोटरसाइकिल पे जंडा ले के निकल रहा है तो गाँधी के किसानों से ज्यादा समृद्ध होगा ) उनमें से  ९०% अभी भी एक गाँधी के इंतज़ार में बैठे है |

अन्ना ने कामन मैन को अपने अनशन का आधार बनया, जिन कामन मैन की बात हो रही है वो एक वर्ग में कामन हैं की जो टीवी देखते हैं, या इन्टरनेट पे फोटो शेयर कर लेते हैं, बाकी सब अनकामन मैन हैं | सारे कामन मैन कहते है की मैं अन्ना हूँ , कोई कामन मैन नहीं कहता की मैं भारत के संविधान को मानता हूँ (कई तो जानते भी नहीं ), और अपने देश को संविधान के अनुसार सुधारूँगा,  वो तो  दलित एवं पिछड़े वर्ग के लोग करते हैं, मायावती जैसों को चुन के | हम कामन मैन तो बस सही कहते हैं (ब्रह्मवाक्य) और हमारी  बात नहीं मानोगे तो दिन रात टीवी पे दिखा दिखा के की "हम दूसरे / तीसरे गाँधी हैं"  तुमसे मनवा लेंगे | तुम्हारी औकात क्या है? क्या जानते हो गाँधी के बारे में ? |  क्या यह इन कामन मैनों का अहंकार नहीं  है ?

अन्ना ने अनशन किया तो, अनशन हमारे देश पूजनीय हो गया है आज़ादी के ६२ सालों में अभी तक नहीं था, यहाँ तक रामदेव के अनशन तक भी पूजनीय नहीं था, लेकिन अब तो रोज़ टीवी पे आ रहा है और टीवी पे लोग कह रहे की यह पूजनीय है तो हमें मान लेना चाहिए | जो टीवी पे आ जाता है वो पूजनीय हो जाता है, कुछ दिन पहले दाऊद और छोटा शकील टीवी पे आये वो पूजनीय हो गए, मोनिका बेदी तो बिग बॉस में एक महीने तक थी वो महा पूजनीय हो गयीं | बाकी ६२ सालों तक सारे लोग जिन्हों ने अनशन कियें हैं उनमें से कोई पूजनीय नहीं था क्यूंकि टीवी पे नहीं था |
 
अच्छा जो लोग अन्ना के पीछे खड़े हो कर अन्ना के पूजनीय अनशन में लोकपाल की जयकारे लगा रहे हैं, वे कौन हैं विवेचना करते हैं 

१. देहली के आस पास के इंजीनियरिंग एवं अन्य बड़े कॉलेज के छात्र/छात्राएं , यह सब ज्यादा तर महंगी पढाई, कर रहें हैं, जो की खुद भारत मैं किये गए भ्रष्टाचार का नतीजा है | ऑस्ट्रेलिया में बैठे हुए छात्र भी समर्थन  में हैं | दरअसल Egypt, libya में हुए संघर्षों से आन्दोलन करना अब फैशन में है, और हमारा बॉलीवुड पे मर मिटने वाला युवा दुनिया में चाहे हर क्षेत्र में पीछे हो फैशन में  कहाँ पीछे रहेगा | अन्ना की टोपी, टी-शर्ट, जींस में  आकर्षक लगने वाली  छात्राएं, झंडा उठाये हुए नवुवक, हाथों में डिगिटल कैमरा लिए हुए की फेसबुक पे कमी न रह जाये, हर फ्रेंड ज़रूरी है और उसको अपनी फोटो दिखानी है | ज़्यादातर ऐसे लोगों मैं किसी को कोई लोकपाल से मतलब नहीं है देश में फैले ६२ सालों के भ्रष्टाचार ने  इनका भविष्य सुरक्षित कर रखा है और आगे भी रखेगा|

२. दुसरे तरेह के लोग हैं भारत का बेरोजगार युवक, यह बेचारा हर कहीं पहुँच जाता है, सोच रहा है लोकपाल आने से नौकरी लग जाएगी, और विदेश का काला धन वापस आ जायेगा तो सारा उसी को मिलेगा, बस यही सुनहरे ख्वाब लिए युवक लगा हुआ है | यह पहले रामदेव के अनशन पे भी पंहुचा था, लेकिन वहां लाठी मिली, खैर अन्ना वाले में उसको लग रहा है की आधी लड़ायी जीत ली है उसने और माने बैठा है की आधी लडाई अभी बाकी है, और लडाई के बाद उसी की चलेगी | लेकिन यह भूल बैठा है की जो पैसा आयेगा वो अन्य ज़रूरी कामों में लगेगा जैसे,  मुकेश अम्बानी अभी नौ नंबर पे सबसे ज्यादा पैसों वाला आदमी है उसे हमें कम से कम शुरू के २ में  पहुचना है, हम भारतीय वचनबद्ध हैं, इसी लिए हम टीवी देखते हैं| इससे हमारी दुनिया में पहचान बनती है नौकरी गयी तेल लेने | हमारी कार्पोरेशनो को हमें दुनिया में सर्वश्रेष्ठ बनाना है, उनके मालिकों की मेहरारुओं को खाली टाइम में खेलने के लिए क्रिकेट टीमें भी खरीदवानी है, फिर हेलीकाप्टर, बाकी फिर मीडिया की फंडिंग, आखिर यह लोग भी एक स्तम्भ है भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी जीत के| अगर कहीं इन सब के बाद पैसा ख़तम हो गया तो कोई बात नहीं हमारी पहचान तो दुनिया में बन जायेगी, एक दो बार विदेशी हेरोइने देश में आ कर करतब दिखाएंगी, हम उनके गायकों को अपने डिस्को में सुन के नाचेंगे, हमारे फिल्मकार विदेशों के लिए फ़िल्में बन्येंगे और ओस्कार जीतेंगे, और हम अजय देवगन को दाऊद के रोल में देख के फक्र कर सकेंगे की इंटरनेशनल हो गए | हम इसी में खुश रहेंगे,  हाँ फिर टीवी कहाँ छूटी जा रही है,  टीवी देखते रहेंगे एक और गाँधी के इंतज़ार में |

३. व्यापारी समाज, यह तो अन्ना के  समर्थन में ऐसा पहुंचा की, अब तो लग रहा है इस बार दिवाली में शुद्ध खोये की बर्फी खाने को मिल ही जाएगी, और भगवान् को बिना मिलावट के घी का दिया जलेगा | उत्साह इनमें ऐसा है की जैसे जमाखोरी से कान पकड़ लिया हो,  और संभवतः आज के बाद पैसों को भगवान् मानना बंद कर देंगे|   

४. चौथे प्रकार के लोग वे लोग हैं जो बचपन से किताबों में गाँधी लीला पढ़ रहे हैं, और मीडिया द्वारा बनाये गए  मायाजाली (Matrix) गाँधी को गांधीगिरी  (मार्डेन गांधीवाद) करते देखना चाहते हैं| इनमें से कई लोग छोटे थे जब भारत आज़ाद हुआ था, और सिर्फ, गाँधी की कहानियां ही सुन सके, इनमें ऐसे कई लोग हैं जो आज तक "जिंदा" हैं  |  जैसे की काफी और ज्यादा लोग आ जाते अगर मीडिया ने अन्ना को गाँधी नहीं, सुपर कमांडो ध्रुव बना के पेश किया होता, ऐसे लोगों की तादाद ज्यादा है और अभी जवान भी हैं | कोई नहीं यह लोग इसी बात से मगन तो हैं चलो गाँधी की राह पे देश में कुछ तो हुआ | 

५. गरीब कामगर लोग / मजदूर/ गरीब रेडी वाले यह बेचारे सीधे साधे लोग होते हैं, यह लोग सिर्फ दर्शन करने पहुँचते हैं, इनसे कह दो की कोई संत अनशन पे बैठा है और दो दिन से खाना नहीं खाया है, तुरंत यह लोग अपने आप को उससे जोड़ लेते हैं, इनके घर मैं भी दो दिन में एक बार खाना बनता है |

यह सिर्फ दर्शान्हेतु पहुँचते हैं, की एक बार इन्हें भी दर्शन हो जाएँ,  क्या पता बाद में कोई कहे तुम देख ही नहीं  पाए  और फलां भगवान् बन गया | यही लोग हैं जो भीड़ बढ़ाते हैं, यहाँ पर भीड़ की ज़रुरत थी हमें तो हम इनकी तारीफ कर रहें हैं, की देखो गरीब आदमी भी हमारे साथ है और भ्रष्टाचार की लड़ाई में हमारा समर्थन कर रहा है |

नहीं तो यही लोग ट्रेफिक जाम लगाते हैं, इनकी भीड़ से बदबू आती है, वहां हम इनको गाली देते हैं | कालोनी में रहने वाले लोगों के लिए यह लोग सबसे बड़ा भ्रष्टाचार हैं, क्यूंकि यह गंदे हैं, कोई और हैं और इनके वहां रहने से, कालोनी के लड़के बच्चों पे बुरा प्रभाव पड़ेगा | पूरी कालोनी इंतज़ार में है की लोकायुक्त के आते ही से सबसे पहले इन्ही लोगों का भ्रष्टाचार ख़तम करेंगे, और इनसे इनकी अधिग्रहित ज़मीने छीन के इनको, भैसों की तरह शहर से बहार भागने पे मजबूर कर देंगे, और इनकी जमीनों पे बिग अप्प्ल या बिग बाज़ार लगा देंगे क्यूंकि वो ज्यादा अच्छा कस्टमर एक्सपेरिएंस देते हैं |
(अगर आप को मेरे इस कथन में  कुछ भी संदेह है, तो आज कल यह कालोनी वाले लोग इनसे इतने त्रस्त हो गए हैं की इनके बच्चों को अपने पेड़ से फल तोड़ने के लिए गोली मार देते हैं | जो काम रिटार्यड कर्नल कंदास्‍वामी रामराज ने अपनी रायफल से किया, उससे कहीं ज्यादा यह लोग लोकपाल से अपेक्छा करते हैं )

यह चिंतनीय है जब एक भारतीय जो सम्रद्ध हो गया इतना दिल में द्वेष रखता है और कहता है की भ्रष्टाचार हटाओ, वापस यह अहंकार है, हो सकता है अन्ना अहंकारी न हों लेकिन उनके आन्दोलन से अहंकार की बू ज़रूर आती है |


२००३ के इलेक्शन जिसमें आज कल के नए मीडिया के जिन सारे पंडितों की वोट गड्नाएं और इंडिया शाइनिंग आन्दोलन की जनता ने बघिया उधेड़ दी थी | वो फिर वापस आ गए हैं, और इस बार अन्ना को ले के ए हैं फिर से उन्हों  ने किसको पकड़ा ? इन्हीं अहंकारी लोगों को, और फिर से यह पंडित अपने आप को साबित करना चाहते हैं,  की इस बार वो जिसको सर पे गाँधी टोपी रख दें जनता उसे गाँधी मान ले | यह अहंकारी लोग सब मान रहे हैं, और लोकतंत्र को ताक पे रख कर रामलीला  मैंदान में जा के जमा हो गए हैं | इन अहंकारी लोगों में वो लोग हैं, जिनको अपनी पढाई पे अहंकार है, कंप्यूटर चला लेते हैं इसी बात का अहंकार है, कई ऐसे लोग हैं जिनको अपने साफ़ छवि पे अहंकार है, अपने भ्रष्टाचार मुक्त कैरिअर पर अहंकार है, कुछ तो इसी बात पे अहंकार करते हैं की गाँधीवाद भारत की सोच है |

आन्दोलन के नैतिक मूल्य साबित किये बगैर उसमें शिरकत करना अँधापन है फिर चाहे वो जितना भी फ़ायदा कराता हो |
And I refuse to be blind